Sunday, December 19, 2010

नवंबर में जन्मे युवा दयालु होते हैं

            क्या आपका बर्थ डे नवंबर में है
  नवंबर में जन्मे युवा दयालु होते हैं                  
आपका जन्म किसी भी साल के नवंबर महीने में हुआ है तो एस्ट्रोलॉजी कहती है कि आप इस दुनिया में सबकी भलाई करने के लिए जन्मे हैं। आप अत्यंत दयालु और परोपकारी हैं। सहनशक्ति के हिसाब से भी आप कमाल के बंदे हैं। जब तक आपका स्वाभिमान हर्ट ना हो जाए तब तक हर छोटी-बड़ी बात आप सिर से गुजर जाने देते हैं।
आप सबके बीच सामंजस्य बैठाने का काम बखूबी निभाते हैं। अक्सर दोस्तों के पैचअप करवाने की जिम्मेदारी आपकी होती है। यूँ तो दुनिया आपको बड़े ही शांत और सौम्य रूप में जानती है लेकिन जिसने आपका गुस्सा देखा है वही जानता है कि आपके भीतर कितना तूफान भरा है। इसकी वजह से आप कम उम्र में ही ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी का शिकार हो सकते हैं। 
आप दोस्तों के लिए कुछ करें या ना करें दोस्त आप पर जान लुटाने के लिए तैयार खड़े रहते हैं क्योंकि आपके भोलेपन के वे कायल होते हैं। आपकी तरक्की से जलने वालों के लिए चेतावनी है कि नवंबर वालों के दुश्मन सीधे मुँह की खाते हैं अत: सावधान। नवंबर माह में जन्में युवाओं में प्यार का अथाह सागर होता है। जिसे प्यार करेंगे वह अगर ना मिल पाए तो भी उसे भूल नहीं पाएँगे। और जो अगर प्यार मिल जाए तो उसकी खुशी के लिए खुद को मिटाकर भी तृप्त नहीं होते।
फिर वही बात कि अत्याधिक दयालु जो होते हैं।
कुछ युवा जो नवंबर में जन्मे हैं और जिनकी राशि वृश्चिक या मेष है उन पर कंजूस होने का आरोप लग सकता है अन्यथा सामान्यत: नवंबर के युवा दिल के इतने उदार होते हैं कि सामने वाले के चेहरे पर मुस्कान देखने के लिए खुद की जेब खाली करके भी खुश रहते हैं। 
पैसा इनके पास जितना भी आए, सेविंग के तरीके खोज ही लेते हैं। पूरी तरह से खाली ये कभी नहीं होते। इनके किसी ना किसी पर्स या पेंट की जेब से पैसे निकल ही आएँगे। थोड़ी व्यग्रता पर कंट्रोल कर ले तो इनके जैसा करीने से रहने वाला मिलना मुश्किल है। हर काम सुव्यवस्थित और साफ-सुथरा। इनके बचपन से लेकर अबतक के छोटे से छोटे डॉक्यूमेंट भी किसी फाइल में सुरक्षित रखे मिल जाएँगे। यहाँ हम आपको थोड़ा सा सनकी कह सकते हैं। कुछ-कुछ कन्फ्यूज्ड और कुछ-कुछ क्रिएटिव।
 अतीत से इन्हें गहरा लगाव होता है। अपनी हर पहली बात या पहली चीज अपनी स्मृति में संजोकर रखते है। अक्सर इस माह में जन्मे लोग संवेदनशील लेखक, पुलिस, पत्रकार, कलाकार, सर्जन या गुप्तचर विभाग में होते हैं। मन इनका बच्चों की तरह होता है इसीलिए बच्चों से इन्हें बेहद प्यार होता है।
इनका इंटि्यूशन पॉवर तो माशाअल्लाह होता है। किसी बात का पूर्वाभास होना या सूरत देखकर आदमी की फितरत पहचानना इनके लिए आसान होता है। आकर्षक मुखाकृति और मासूमियत के कारण नौकरी हो या घर, प्यार हो या दोस्ती, इनके सौ गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। अपने बालों का इन्हें विशेष ख्याल रखना चाहिए वरना गंजे हो सकते हैं। बड़ी-बड़ी हाँकने की प्रवृत्ति से भी थोड़ा बचें तो सही वक्त पर सही जीवनसाथी मिल जाएगा। 
नवंबर माह की लड़कियाँ भावुक दिखतीं है पर होती प्रेक्टिकल हैं। चोट खाने पर खुद को समय पर संभाल लेती है। 
यही वजह है कि अपने दुख के लिए कभी दूसरों का कंधा इस्तेमाल नहीं करती। बेमिसाल सहनशक्ति के कारण जीवन की हर जंग जीत लेती है। अभिव्यक्ति थोड़ी सी कमजोर होती है इसलिए उम्मीद करती है कि इनके आसपास के लोग इनकी बात स्वयं समझ लें। लोग जब इन्हें समझ नहीं पाते हैं तो ये झल्ला पड़ती हैं। 
नवंबर माह वालों के लिए सलाह है कि वे अपनी कम्युनिकेशन स्किल सुधारें क्योंकि इसकी वजह से अक्सर लोग आपको गलत समझ लेते हैं। अपने सौम्य स्वरूप का गलत फायदा ना उठाएँ बल्कि सच्चाई और ईमानदारी आपकी ताकत है उसका इस्तेमाल करें। 
कल्पना लोक से बाहर आएँ जिंदगी के कई रंग बस आप ही के लिए खिले हैं आप को उन्हें समय पर पहचानना है। हमारी शुभकामनाएँ। 
लकी नंबर : 3, 1, 7 
लकी कलर : पिंक, सफेद और चॉकलेटी
लकी डे : गुरुवार और मंगलवार 
लकी स्टोन : पर्ल और मून स्टोन 
सुझाव : तेल में अपना चेहरा देखकर मंदिर में दान करें रूकावटें दूर होंगी। 

Monday, November 29, 2010

शादी से पहले 'सेहत-कुंडली' मिलाएँ




          शादी से पहले 'सेहत-कुंडली' मिलाएँ
विवाह एक सामाजिक संस्कार है, जो दो दिलों का मिलन है। विवाह-संस्था के द्वारा परिवार के रूप में कुटुम्ब परंपरा आगे बढ़ती है। शादी से पहले अभिभावक दूल्हा-दुल्हन की जन्मपत्री का मिलान कराते हैं। जन्मपत्री में ग्रह के उपयुक्त मिलान होने पर ही शादी तय होती है। 
शादी से पहले अपको अपने भावी पाटर्नर के साथ प्रीमैरिज काउंसलिंग जरूर करना चाहिए| इसमें हम ब्लडग्रुप, एचआईवी, थैलेसीमिया,और हेपेटाइटिस बी जैसी जांच होती हैं| ताकि आपका स्वास्थ्य को आंका जा सके |मुझे लगता हैं कि हर पढें-लिखे और समझदार परिवार को शादी से पहले वर–वधू की यह जांच जरूर करवानी चाहिए,ताकि वे सेहतमंद रहे| प्रीमैरिज काउंसलिंग करवाने से आप दोनों नए जीवन की शुरुआत सहजता से कर सकेंगे |
चिकित्सकों के अनुसार विवाह पूर्व मेरिज-काउंसलिंग होना जरूरी है। एक-दूसरे के विचारों, व्यवहारों, पसंद-नापसंद के अतिरिक्त स्वास्थ्य दृष्टि से शारीरिक गुणों में भी मिलान होना जरूरी है। यदि कोई भी युवक-युवती किसी अनजाने रोग से ग्रसित है तो वह अपने जीवनसाथी को तो रोग देगा/देगी ही, साथ ही आने वाली पीढ़ी को भी रोग से ग्रसित कर सकता/सकती है। 
अतः चिकित्सकों के अनुसार जन्म-कुंडली के साथ स्वास्थ्य-कुंडली का मिलान होना जरूरी है, जो सुखी-समृद्ध वैवाहिक जीवन की सबसे पहली शुरुआत होगी। कई रोग पारिवारिक रूप से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते रहते हैं जैसे मधुमेह, थैलेसीमिया, मोटापा, हृदयरोग, हिमोफीलिया, कलर ब्लाइंडनेस, गंजापन आदि। यदि पति-पत्नी दोनों को मधुमेह है तो आशंका यह व्यक्त की जाती है कि आधी संतानों को 40 वर्ष की वय के उपरांत मधुमेह कभी भी उभर सकता है। 
आज के आधुनिक जीवन में कई युवक-युवतियाँ विवाह-पूर्व असुरक्षित यौन-संबंधों के जाल में उलझ जाते हैं। उनकी थोड़ी-सी लापरवाही एड्स जैसे गंभीर रोग को आमंत्रण दे सकती है। ऐसे संबंधों से अन्य संक्रमण जैसे सिफीलिस, गोनोरिया, हरपीज होना भी आम है। ये सभी रोग विवाह के बाद एक जीवनसाथी से दूसरे जीवनसाथी को 'गिफ्ट' के रूप में मिल जाते हैं तथा बच्चों को भी पैदा होते ही घेर लेते हैं। ऐसे संक्रमणों और आत्मघाती रोगों से बचने के लिए स्वास्थ्य-पत्री मिलान अत्यंत जरूरी है। यह स्वास्थ्य-पत्री 6 हिस्सों में हो सकती है
एड्स-पत्री : विवाह पूर्व युवक-युवतियों को एड्स का संक्रमण है या नहीं, इस हेतु एचआईवी टेस्ट करा लेना चाहिए। एड्स एक लाइलाज रोग है, इसका बचाव ही उपचार है।
सिफीलिस-पत्री : यह रोग सर्पकीट ट्रेपोनेमा से होता है। यह यौन संचारित रोग है। भारत में हर 25 में से 1 व्यक्ति को यह रोग है। यह रोग स्वयं को तो नुकसान पहुँचाता है, साथ ही आने वाली पीढ़ी जन्मजात सिफीलिस रोग लेकर पैदा होती है। इससे जन्मजात हृदयरोग भी हो सकता है तथा कई युवतियों में यह बार-बार गर्भपात हो जाने का कारण भी बनता है। 
थैलेसीमिया-पत्री : थैलेसीमिया मेजर एक ऐसा रोग है जिसमें बच्चे का खून स्वतः समाप्त होता जाता है। बच्चे को नियमित रूप से रक्त चढ़ाना पड़ता है। अतः थैलेसीमिया मेजर न हो, इस हेतु भावी पति-पत्नी को एचबीए-2 नामक हिमोग्लोबिन का टेस्ट कराना चाहिए जिससे थैलेसीमिया माइनर होने का पता लग जाए। यदि दूल्हा-दुल्हन दोनों एचबीए-2 पॉजीटिव हैं तो विवाह तय नहीं करना चाहिए। 
हेपेटाइटिस बी एवं सी-पत्री : हेपेटाइटिस बी एवं सी लीवर को प्रभावित करने वाले संक्रामक रोग हैं, जो कालांतर में व्यक्ति की जान ले सकते हैं। यह रोग शारीरिक संपर्क से फैल सकता है अतः इस रोग का पता विवाह पूर्व हो जाना जरूरी है। भारत की कुल आबादी के 4-5 प्रतिशत लोग हेपेटाइटिस-बी से प्रभावित हैं। 
ब्लड ग्रुप-पत्री : यदि महिला का ब्लड ग्रुप नेगेटिव और पुरुष का पॉजीटिव है तथा इसके चलते बच्चे का ब्लड ग्रुप भी पॉजीटिव है तो समस्याएँ खड़ी हो सकती हैं अतः ब्लड ग्रुप का मिलान भी विवाह पूर्व हो जाए तो बेहतर है। 
टॉर्च-पत्री : टॉर्च गर्भवती महिलाओं को प्रभावित करने वाला 4 रोगों का समूह है जिनमें टॉक्सोप्लाज्मोसिस, सायटोमेगालोवायरस, रुबेला एवं हरपिज शामिल हैं। ये रोग युवतियों में विवाह पूर्व होने पर भावी संतान मानसिक और शारीरिक रूप से विकलांग पैदा हो सकती है अतः विवाह पूर्व टॉर्च टेस्ट करा लेना चाहिए। 

Friday, November 26, 2010

फैशन ज्योतिष

फैशन ज्योतिष : फैशन इंडस्ट्री बेहद तेजी से बढ़ रही है। हर दिन यह अपने साथ नई तकनीक और बाजार के नए ट्रैंड्स को जोड़ती जा रही है। इन दिनों फैशन की गलियों में जो नया नाम सुनाई दे रहा है वह है फैशन ज्योतिष,जहां परिधानों के डिजाइन और स्टाइल में ज्योतिष के अनुभव भी शामिल हैं। मंत्रों और श्लोकों के बाद अब राशिफल बांच रहे हैं डिजाइनर। क्या आप भी किसी फैशन ज्योतिषी से अपना भविष्यफल जानना चाहेंगे? तो सबसे पहला सवाल यह कि आप अपने भविष्य को लेकर क्या सोचते हैं?आपको कौन-कौन से ब्रांड की जानकारी है?अगर कभी ज्वैलरी खरीदनी हो तो किस तरह की खरीदेंगे? एक्सेसरीज पर कितना पैसा खर्च करते हैं?इन्हीं सवालों के साथ एक और सवाल है कि क्या आप ज्योतिष पर यकीन करते हैं?आपको अपनी राशि मालूम है? दरअसल ये सारे सवाल एक दूसरे से गहरे जुड़े हैं।
फैशन राशिफल
मेष :  इस राशि के लोगों को शुद्ध और सिंथेटिक फेब्रिक से बने परिधान पहनने चाहिए।
लाल, पीला, नारंगी रंग का चयन करें। नीले, ग्रे और काले रंग के प्रयोग से बचें। इनको चमड़े या पक्षियों के पंखों से बने परिधानों से भी बचना चाहिए। ऐसे परिधान पहनें, जिसमें बहुत तरह के कट्स हों। बहुत सारे रंगों से बने डिजाइन पहनें।
वृष : चमकीला सिल्क, सिंथेटिक फेब्रिक इस राशि वालों के लिए अनुकूल नहीं है।
इस राशि के लोगों को सफेद और हल्के हरे रंग का प्रयोग करना चाहिए। लाल और नारंगी रंग के प्रयोग से बचें। अधिकतर सादे या फिर बहुत सारे डिजाइन वाले परिधान पहनें।  सिल्वर और प्लेटिनम इस राशि के लोगों के लिए अनुकूल हैं।
मिथुन : शुद्ध कपास और लिनेन से बने परिधान इनके लिए अच्छे हैं, लेकिन इनको सिंथेटिक कपड़ों से बचना चाहिए।
हरा रंग इनके अनुकूल है,लेकिन पीला नहीं। सादे और बहुत सारे डिजाइन वाले परिधान इनके अनुकूल हैं।
कर्क : रेशम, सूती और लिनेन इनके लिए अनुकूल हैं।
सिंथेटिक कपड़ों से बचें। सफेद,हल्का पीलापन लिये हुआ सफेद रंग पहनें। नीले और काले रंग का कपड़ा न पहनें। सादे डिजाइन किए हुए कपड़े पहनें।
सिंह : इस राशि वालों के लिए सूती कपड़े अच्छे हैं।
लाल, पीले, नारंगी उपयुक्त हैं। नीले, काले, भूरे और धूसर रंगों से बचें। आउटफिट्स में बहुत सारे कट्स का प्रयोग करें, लेकिन चमड़े और पंखों से बने परिधान न पहनें।
कन्या : सूती कपड़े से बने परिधान इनके लिए उपयुक्त हैं।
इनको हरे और सफेद रंगों को चुनना चाहिए। हल्का हरा, सफेद और पीले रंग से बचना चाहिए। कन्या राशि के लोगों को भी सादे डिजाइन ही पहनने चाहिए।
तुला : चमकीला सिंथेटिक सिल्क इस राशि वालों के लिए अनुकूल है।
सफेद,हल्का हरा और भूरा भी पहन सकते हैं, परंतु लाल और नारंगी रंग से बचें। सादे और बहुत सारे डिजाइन वाले परिधान पहन सकते हैं।
वृश्चिक : मिश्रित सूती कपड़ा पहनें।
लाल,पीला और नारंगी रंग का कपड़ा पहनें। नीले भूरे और काले रंग से बचें। सादे और बहुत सारे डिजाइन वाले कपड़े पहनें।
धनु : सिंथेटिक और चमकीला सिल्क पहनें।
पीला, शिफॉन और हल्का नारंगी रंग पहनें। नीले और काले रंग से बचें।
मकर : कॉटन, लिनेन इस राशि के लिए अच्छे माने जाते हैं।
सिंथेटिक का इस्तेमाल न करें। रंगों में इन्हें नीले, काले, भूरे का इस्तेमाल करना चाहिए। इस राशि के लोगों को लाल, सफेद और नारंगी रंग से बचना चाहिए।
कुंभ : कॉटन, सिल्क, लिनेन इस राशि के लिए अच्छे माने जाते हैं।
सिथेंटिक का इस्तेमाल न करें। रंगों में इन्हें नीले,काले, भूरे का इस्तेमाल करना चाहिए। इस राशि के लोगों को लाल, सफेद और नारंगी रंग से बचना चाहिए।
मीन: इस राशि के लोगों के लिए सिंथेटिक और चमकीले सिल्क के कपड़े अच्छे रहते हैं।
पीले, केसरिया और हल्के नारंगी रंग के व इन्हें पहनने चाहिए। काले और नीले रंग से बचें। सादे और मल्टी डिजाइन कपड़े पहन सकते हैं।



Tuesday, May 25, 2010

विषय चयन में सहायक कुडंली

विषय चयन में सहायक कुडंली
उच्च शिक्षा किस विषय की होगी इसके लिए जातक की कुडंली में पंचम भाव एवं उसके अधिपति की और ध्यान देना होगा| पंचम भाव से ज्ञान का पता चलता है|उच्चस्तर की शिक्षा के लिए पंचम भाव का बलवान होना अवश्यक है| पंचमेश का उच्च होना, स्वराशि का होना या किसी और ग्रह के स्वामी से स्थान परिवर्तन से पंचम भाव सुद्धढ़  होता है| पंचमेश लग्नेश सप्तमेश होना या उनका और कोई संबंध हो तो जातक को उच्च शिक्षा का अवसर मिलता है| परन्तु पंचमेश का उच्च होने से उच्च शिक्षा अवश्य मिलेगी |
इसके कुछ अपवाद भी है तुला लग्न में यदि पंचमेश शनि उच्च का का होकर लग्न में हो और लग्नेश शुक्र के साथ उसका संबंध व स्थान परिवर्तन या उसके आमने सामने न हो वह व्यक्ति माध्यमिक शिक्षा में भी बडी कठिनाइयों   से उतीर्ण होगा| इसके अतिरिक्त यदि पंचम भाव में कोई ग्रह उच्च का हो उसको शनि देखता हो और पंचमेश न तो उच्च का हो न स्वराशि का हो न ही उसका स्थान परिवर्तन हो तो जातक आगे पढ़ता ही रहेगा
अब यह जानने के लिए कौन-कौन से विषय में जातक पांरगत होगा पंचम भाव व उसके अधिपति व उसके अधिपति का दुसरे भावों व उनके स्वामियों के संबंधों को समझना होगा| इस संबंध में जो भाव अति बलवान है चाहे उसके पंचम भाव के स्वामी का कोई संबंध है या नहीं उस भाव के विषय को अवश्य पढ़ेगा|
शिक्षा की तीन धाराएं है-विज्ञान, कला, वाणिज्य आज शिक्षा सहस्त्र धाराओं में बट गई है और कई नाम तो ऐसे है जो सुनने में पहले कभी नहीं आये इन सब को बारह भागों में बाटना भी कठिन है| परन्तु ज्योतिष में हमें देश काल पात्र का ध्यान अवश्य रखना पड़ता है| किस भाव से कौन-कौन विषय होगे व हर भाव की अपनी विशेषता व विविधता है| एक ही भाव से बहुत सारी बातों की विवेचना करते है
1- विदेश में शिक्षा व रोजगार के अवसर के लिए बारहवें भाव,सप्तमेश तथा शुक्र ग्रह का विश्लेषण आवश्यक है|
2 - पद का स्तर जैसे प्राइमरी स्कूल में शिक्षक अथवा विश्वविधालयमे में रीडर जानने के लिए वृहस्पति का बल देखा जाता है|
3 - विशेष चयन प्रकिया में सूक्ष्म विश्लेषण के दुसरा भाव, चतुर्थ भाव, नवम भाव तथा दसम भाव का अवलोकन अवश्य है|
4 - चतुर्थ भाव से शिक्षा का बोध होता है|
5- चतुर्थ भाव पर शुक्र के प्रभाव से संगीत व कला से संबंधित विषय चुनना क्षेयस्कर है|
6 -सूर्य योग कारक हो तो राजनीतिशास्त्र विषय से प्रशासनिक सेवा में जाने के अवसर आसान हो जाते है|
7- बुध के बलानुसार गणित, प्रत्रकारिता, वाणिज्य, चार्टर्ड एकाउंटेंट का विषय का चयन करना चाहिए|
8- बुध शुक्र की युक्ति से दर्शन शास्त्र लाभकारी होता है|
9-शनि-वृहस्पति के योग से वकालत पढ़ना श्रेयस्कर रहता है|
10- शुक्र-शनि का योग इलेक्ट्रॉनिस व कम्प्यूटर के विषयों धनोपार्जन करवाते है|
11- राहु से रसायन शास्त्र
12- शनि कि पंचम भाव पर दृष्टि से विज्ञान के अन्य विषय चुनने चाहिए|
13- बुध और धनेश का संबंध स्वतंत्र व्यापार करवाता है
अधिकतर यह देखा गया है कि आज के प्रतिस्पर्धा के युग में कई बार शिक्षा की धारा बदलनी पड़ती है| पहले सभी विज्ञान पढ़ना चाहते है असफल होने पर कला व वाणिज्य की और लौट पड़ते है इसका असली कारण ग्रह और भावों का निरबल संबंध है| शिक्षा की धारा वही होगी जो कि ग्रह और भावों का बलवान संबंध बनाती है| कई बार ऐसा भी होता है कि संबंध बलवान होने पर वह शिक्षा अध्यन काल के समय में नहीं मिलती और बहुत देर बाद पुनः महादशा भुक्ति परिपक्व होती है तो वह व्यक्ति उस शिक्षा का अध्ययन करता है|
जातक की उच्च शिक्षा विषय में जानने से पहले दो बातो का ध्यान रखना अतिआवश्यक है| पहले तो यह कि विज्ञान, कला व वाणिज्य, इंजिनियरिंग के विषयों का तालमेल बैठाना है| किसी को रसायन, भूगोल, इतिहास के साथ इंजिनियरिंग नहीं मिल सकती| भौतिक, गणित और सामाजिक शास्त्र लेकर कोई डाक्टर नही बन सकता| दुसरी बात तो और भी अधिक  आवश्यक है| शिक्षा जीविकोपार्जन का साधन है| शिक्षा केवल शिक्षा के लिए ही नही है| शिक्षा विज्ञान, कला व वाणिज्य की होगी इसके लिए दशम भाव को देख कर और उसकी जीविका किस तरह की होगी यह जानकर ही शिक्षा के विषयों का निणर्य लेना चाहिए| कोई भी डाक्टरी की परीक्षा देकर दुकान पर नहीं बैठ सकता| इसलिए व्यक्ति की उच्चस्तर की शिक्षा का निर्णय लेने से पहले यह ठिक तरह से देख कर निर्णय लेना चाहिए|

Saturday, May 15, 2010

तेरापंथ के आचार्य महाप्रज्ञ का निर्वाण व महाश्रमण पर आचार्य का दायित्व

महाप्रज्ञ का जन्म १७ जून १९२० राजस्थान के झुझुनूं जिले के छोटे से गांव टमकोर में हुआ था अपने परिवार में नथमल के नाम से जाने जाते थे| दस वर्ष की आयु में सन्यास ले लिया था| ९० सालों के महाप्रज्ञ के अंतिम दर्शन करने के लिए देश भर से बड़ी संख्या में उनके अनुयायी सरदारशहर पहुचे| उनकी अंतिम यात्रा में तीन घंटे का समय लगा| पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, शान्तिधारीवाल,शिक्षा मंत्री भँवर लाल मेधवाल,पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे सिधया,भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी,राज्य सभा सांसद ललित किशोर चतुर्वेदी,बीकानेर के सांसद अजुर्न मेघवाल सहित देशभर से कई राज नेता और बड़े उधोगपति एंव सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधी उनके अंतिम दर्शन करने सरदारशहर पहुचे|
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम महाप्रज्ञ के विचारों से बहुत प्रभावित थे इसलिए अंतिम दर्शन के लिए पहुचे| राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील, प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह, काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाधी, कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों एंवम राज्यपालों संहित लालकृष्ण आड़वानी सहित अनेक गणमान्य हस्तीयो ने संदेश भेजकर उनके निधन पर शोक जताया|एंवम राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हेलीकाप्टर से सरदारशहर पहुचे व महाश्रमण व साध्वी प्रमुखा से चर्चा की|
रविवार सुबह ९.५५ से १०.१५ बजे तक उन्होंने श्रद्धालुओं के बीच प्रवचन किया दोपहर दो बजे सीने में दर्द कि शिकायत पर डाक्टरों की टीम पहुचीं व उपचार शुरू किया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका| युवाचार्य महाश्रमण ने दोपहर बाद तीन बजे आचार्य महाप्रज्ञ के देवलोक गमन की घोषणा की|महाप्रज्ञ के निर्वाण से तेरापंथ समाज स्तब्ध है| साधु-सतियों में शोक व्याप्त है|
अणुव्रत आंदोलन में अह॒म भूमिका निभाने वाले महाप्रज्ञ जैन विश्व भारती विश्वविधालय के अध्यक्ष थे| प्रेक्षाध्यान के अविष्कारक और जीवन विज्ञान का प्रयोग करने वाले महाप्रज्ञ ने अहिंसा यात्रा के माध्यम से देश को एक नई दिशा दी| उन्होंने तीन सौ से अधिक पुस्तकें लिखी| जैन योग एवं ध्यान परंपरा के साथ जैन आगमों के भी वे संपादक रहे|
महाप्रज्ञ के बाद अब युवाचार्य महाश्रमण को धर्मसंघ के ११ वे आचार्य का दायित्व सौपा गया है | ११ वे आचार्य का दायित्व सभ्भालने वाले आचार्य महाश्रमण मुदित कुमार का जन्म सरदाशहर में विक॒म संवत २०१९ में हुआ| पिता डुगर मल दुगड़ व माता नेमा देवी के घर जन्मे महाश्रमण को २८ वर्ष कि आयु में १४ सितम्बर १९९७ को आचार्य महाप्रज्ञ ने गंगाशहर में तेरापंथ धर्म संध के युवाचार्य के पद पर प्रतिष्ठत किया था| उन्होंने ने संवत २०३१ में दीक्षा ली थी|
युवाचार्य श्री महाश्रमण मानवता के लिए समपिर्त जैन तेरापंथ के उज्जवल भविष्य है|१३.५.१९६२ को सरदारशहर में जन्मे सरदारशहर में ही ५.५.१९७४ को दीक्षित तथा प्रचीन गुरु परम्परा की श्रृंखला में आचार्य महाप्रज्ञ द्धारा अपने उतराधिकारी के रूप में मनोनित युवाचार्य महाश्रमण विनम्रता की प्रतिमूर्ति हैं| अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक आचार्य श्री तुलसी की उन्होंने अनन्य सेवा की तुलसी-महाप्रज्ञ जैसे सक्ष्म महापुरुषों द्धारा वे तराशे गये है|
महाश्रमण उम्र से युवा है, उनकी सोच गभ्भीर है, युक्ति पैनी है द्ष्टि सुक्ष्म है तथा कठोर परिश्रमी है, उनकी प्रवचन शैली दिल को छु लेने वाली है|
युवाचार्य की प्रज्ञा एवं प्रशासनिक बूझ बेजोड़ है, गौर वर्ण, आकर्षक मुख मंड़ल, सहज मुस्कान से परिपूर्ण ब॒ह्म व्यक्तित्व एंव आंतरिक पवित्रता, विनम्रता, शालीनता व सहज जैसे:प्रोत युवाचार्य महाश्रमण से न केवल तेरापंथ अपितु पूरा धार्मिक जगत आशा भरी नजरों से निहार रहा है और उनकी महानता को स्वीकार कर रहा है|
११ वे आचार्य महाश्रमण का पदाभिषेक २३ मई को उतराफाल्गुनी नक्षत्र  कन्या राशि के चन्द्रमा पर विधा मंदिर सरदारशहर में सुबह ८.३० मनाने की सुचना मिली है

Monday, May 10, 2010

राहु एक विलक्षण और रहस्यमय ग्रह........आगे

राहु एक विलक्षण और रहस्यमय ग्रह........आगे
राहु कुटनीति का सबसे बडा ग्रह है,दिमाग को खराब करने में अपनी ताकत लगा देता है| शादी अगर किसी प्रकार से राहु की दशा-अंन्तरदशा में करदी जाती है तो  वह शादी किसी प्रकार से चल नहीं पाती,अचानक कोई बीच वाला आकर उस शादी में फितूर भर देता है और शादी टुटने के कगार पर आ जाती है,कोट केश चलते है,गृहस्थ सुख नहीं मिलते जातक के पूर्व करमो को उसी रूप से प्रायचिश्त करा कर उसको शुद्ध कर देता है
राहु जिस घर में बैठता है 19 वे साल उस घर का  जरूर फल देता है,सभी ग्रहो को छोड़ कर यदि किसी का राहु सप्तम में हो चाहे साथ में शुक्र हो या बुध या गुरु हो व स्त्री हो तो पुरूष का सुख व पुरूष हो तो स्त्री का सुख यह राहु 19 वे वर्ष में जरूर देता है और उस फल को 20 वें साल नष्ट भी कर देता है| इसलिए 19 वें साल में किसी ने प्रेम प्यार या शादी करली उन्हें एक साल बाद काफी कष्ट हुये| राहु किसी भी ग्रह की शक्ति को खिचता जरूर है परन्तु अपने अन्दर हजम नहीं कर पाता इसलिए वापस छोडता जरूर है|
राह॒ के आगे पीछे 6 अंश तक कोई ग्रह हो तो उस ग्रह की शक्ति ही समाप्त कर देता है| राहु की दशा 18 साल की होती है व इसकी चाल नियमित है तीन कला ग्यारह विकला रोजाना की चाल से अच्छा या बुरा फल जरूर देता है| इसकी चाल से 19 वीं साल में किसी का अगर शारिरिक संबंध बने तो 38 वे साल में भी बनाने पडेंगे या किसी प्रकार 19 वें साल जेल या अस्पताल  या कहीं बंधक में रहा हो तो 38 वे साल में भी रहना पडेगा| राहु के गणना के साथ जो तिथि आज है वही तिथि आज के 19 वीं साल की होगी|
राहु कुडंली में नीच राशि में चतुर्थ,पंचम,सप्तम,अष्टम,नवम,द्धाद्धश भाव में हो तो निश्चित ही आथिर्क,मानसिक,भौतिक पिड़ाये अपनी दशा-अंतरदशा में देता है| अस्त राह॒ भयंकर पीड़ादायक होता है चाहे किसी भी भाव का हो| राहु बारहवें घर में भी बड़ा अशुभ होता है यहां पर जेल या बंन्धक का कारक है|  दशा-अंतरदशा में पागलखाने या जेलखाने या अस्पताल में भेज देता है|
बुध अस्त में जन्मे जातक कभी भी राहु वाले खेल न खेले तो सुखी रहेगा| राहु का संबंध मंनोरंजन और फिल्मों से भी है व वाहन का कारक भी है और राहु को हवाई जहाज के काम और आंतरिक्ष में जाने का कार्य पंसद है| राहु के साथ मंगल वाला जातक धमाका करने में माहिर होता है
राहु से गृस्त व्यक्ति पागल की तरह व्यवहार करता है ,पेट के रोग, दिमागी रोग, पागलपन, खाज-खुजली, भूत-चुडैल का शरीर में प्रवेश करना, नशे की आदत लगाना,गलत स्त्रियों या पुरूषों के साथ संबंध बनाकर विभिन्न प्रकार के रोग लगा लेना, शराब और शबाब के चक्कर में खुद को बबार्द करना, कम्प्यूटर टीवी मंनोरंजन के साधनों में अपना मन लगाकर बैठना, होरर शो देखने की आदत होना, नेट पर बैठकर बेकार की स्त्रियों और पुरूषों के साथ चैटिंग करना और दिमाग को खराब करते रहना, कुत्रिम साधनों से अपने शरीर के सूर्य को यानी वीर्य को झाड़ते रहना, शरीर के अन्दर अति कामुकता के चलते लगातार यौन संबंधों को बनाते रहना और बाद में वीर्य के समाप्त होने पर या स्त्रीयों में रज के खत्म होने पर टीबी, तपेदिक, फेफड़ों की बीमारिया लगाकर जीवन को समाप्त करने का उपाय करना|
उपरोक्त प्रकार के भाव मिलते है तो समझना चाहिए की किसी न किसी प्रकार के राहु का प्रकोप शरीर पर है या तो गोचर से अपनी शक्ति देकर मनुष्य जीवन को जानवर की गति प्रदान कर रहा है अथवा राहु की दशा चल रही है
राहु चन्द्र की युक्ति हो तो यह मान के चले कि चिन्ता का दौर चल रहा है यह युक्ति कोई भी भाव में हो, दिमाग में किसी न किसी प्रकार की चिन्ता लगीं रहती है| महिला हो तो अपनी सास, ससुराल खानदान के साथ बंन्धक की चिन्ता लगी रहती है यह योग किसी भी भाव में  अगर दुरी में चाहे 29 अंश तक क्यों न हो वह अपना फल जरूर देता  है इसलिए राहु जब भी गोचर से या जन्मकुंडली की दशा से दोनों एक साथ होगे तो चिन्ता का समय जरूर सामने होगा|
राहु की उतम दशा में जातक संयुक्त परिवार में रहता है, बाग-बगीचे लगाना और लगातार उन्नति करता है और अपना विकास करता है लेकिन दिमागी फितूर का दौर जारी रहता है|
दशा-अंन्तदशा आरभ्भ होने से पहले ही राहु के बीज मंत्र का जाप अवश्य कर लेना चाहिए राहु चाहे किसी भी भाव का हो|