Sunday, September 4, 2011

ज्योतिष की आड़ में आड़म्बर

समाज में ज्योतिष का प्रभाव वैदिक काल से ही रहा है. वैदिक युग में मानव ने ज्योतिष सहित प्रत्येक ज्ञान को आम जन की भलाई के लिए ही प्रयोग किया. कुछ आसुरी प्रवृत्ति के लोगो ने इस ज्ञान का दुरुपयोग किया तो वे राक्षस कहलाये. स्वभाववश सभ मनुष्य सुख-शान्ति एंव आनन्द प्राप्त करना चाहते हैं. इन सबकी प्राप्ति को सुलभ बनाने हेतु ही परमात्मा ने हमें ज्ञान के रुप में सर्वोत्त्म उपहार दिया है. जीवन में तीन चीजें होती हैं:-
 1) साध्य :- मनुष्य जो इच्छा करता है या जीवन में जो भी प्राप्त करना चाहता है/ जहाँ पहुचना चाहता है, उसे साध्य कहते हैं.
2) साधना:- जिस माध्यम / तरीके से मनुष्य अपने साध्य की प्राप्ति करता है वह साधना कहलाती है.
3) साधन :- साधना में सहयोग/ सहायता करने के लिए जिन-जिन वस्तुओं / उपकरणो की आवश्यकता पड़ती है वे साधन के रुप में जाने जाते हैं.
साधन, साधना की पूर्णता के लिए होते हैं. अतः महत्ता साधना की होती है, साधन की नहीं. साधना की गुणवत्ता को बनाए रखने कि लिए कठिन तप (परिश्रम) करना पड़ता है. तप के द्वारा ही साधन में उर्जा दी जाती है (चार्ज किया जाता है) तभी साधन सहायक के रुप में कार्य करने योग्य हो पाता है. वैदिक काल में एक तो साधन प्राकृतिक रुप से उर्जावान होते थे, दूसरे मनुष्य अपने तपबल की शक्ति से उन्हें जाग्रत कर देता थावैदिक काल की भाँति ही वर्तमान युग में ज्योतिष की महत्ता बरकरार (यथावत) है, बल्कि यदि यह कहा जाये कि आज के समय ज्योतिष अधिक प्रासांगिक है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. संसार पर सदा से ही चतुर व्यक्तियों ने राज किया है. चूंकि ज्योतिष आज बिकता है.तो ऎसे अनाधिकृत व्यक्तियों (श्रद्धाविहीन) ने इसका व्यावसायिक दोहन शुरु कर दिया है. जिनका ज्योतिष शास्त्र में तनिक भी विश्वास नहीं. इस सन्दर्भ में यहाँ बहुत से उदाहरण दिये जा सकते हैं, परन्तु समयाभाव में ऐसा सम्भव नहीं इसलिए एकमात्र उदाहरण देकर ही हम इसे भली-भाँति स्पष्ट कर सकते हैं.आजकल आप टी.वी. के भिन्न-भिन्न चैनलो पर ज्योतिष सम्बन्धी सामग्री (साधनो) की बिक्री के बारे में देख-सुन सकते हैं कि इस विशेष यन्त्र या माला को खरीदने/ धारण करने से आपको विशेष लाभ होगा तथा इस विशेष वस्तु को अपने पास रखने से आपको कष्टो से मुक्ति मिलेगी. जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूँ कि साधन में शक्ति साधना के तप-बल की होती है. मन्त्रो में शक्ति होती है, इस बात पर सन्देह करने का कोइ कारण नहीं परन्तु यहाँ पर विचार करने योग्य प्रश्न यह है कि जो विद्वान किसी धातु के यन्त्र (ताम्बा इत्यादि) को सिद्ध करने का दावा करते हैं क्या वे तपस्वी, श्रद्धावान, ज्ञानी एंव आध्यात्मिक उर्जा से परिपूर्ण है या फिर केवल अर्थ लाभ के लिए सरल एंव पीडित व्यक्तियों की भावनाओं का शोषण करते हैं. किसी विषय का ज्ञान होना एक अलग बात है और उस ज्ञान को सत्यता की कसौटी पर परखना दूसरी बात है. साधना में ज्ञान के साथ-साथ क्रिया पर जोर दिया जाता है. साधना में एक ओर बात तो महत्वपूर्ण होती है, वह है तन, मन एंव बुद्धि की पवित्रता जोकि स्वंय को कष्ट देकर हो(तप द्वारा) प्राप्त की जा सकती है.
यहाँ एक अन्य प्रश्न भी सामने आता है कि क्या इन सब परिस्थितियों के लिए पाखण्डी या ठग ज्योतिषी के साथ-साथ हम सब बराबर के जिम्मेदार नहीं हैं. कोइ भी मनुष्य दुखो का सामना अपने कर्मो या लापरवाही के कारण करता है, कर्तव्यपरायणता एंव न्यायोचित व्यवहार करने तथा दुर्गुणो से दूर रहने पर अधिकतर समस्याओं से बचा जा सकता है. यदि अनजाने में किसी से कोइ पाप हो जाता है तो उसका प्रायश्चित भी उसी को करना पडेगा. भ्रष्टाचार की सम्भावना मनुष्य द्वारा बनाऎ गए प्रशासन में ही हो सकती है, परमात्मा के विधान में नहीं कि कोइ व्यक्ति मात्र धन खर्च करके (अहंकारपूर्ण) अपने पापों से मुक्ति पा सकता है. दान देने से लाभ होता है यह शास्त्रोक्त भी है व सत्य भी है, परन्तु यदि कोइ व्यक्ति अहंकार से युक्त होकर धन के बल पर बिना ग्लानि के महसूस किये यदि यह समझता है कि वह अपने पापों से मुक्ति पा लेगा तो मुंगेरीलाल की भँति स्वप्न ही देख रहा होगा.
उपरोक्त प्रश्नो का सही समाधान यही है कि कष्टो के आने पर व्यक्ति को किसी योग्य ज्योतिर्वेद के पास जाकर सही समाधान के बारे में जानना चाहिये तथा स्वंय कष्ट सहन करके शास्त्रोक्त विधि से विनम्रता पूर्वक साधना करनी चाहिये तभी मुसीबतो से छुटकारा संभव है. क्योंकि स्वंय के मरने पर ही व्यक्ति स्वर्गवासी कहलाता है. अतः हमें टी.वी. चैनलो पर दिखलाये जाने वाले झूठे व भ्रामक प्रचार से बचना चाहिये अन्यथा कुछ व्यवसायी एंव धोखेबाज ज्योतिषियो के कारण ज्योतिष विद्या पर आँच आ सकती है तथा लोगो का विश्वास इस पर से उठ सकता है. 



Thursday, August 25, 2011

भोजन संबंधी आदतें और ज्योतिष


ज्योतिष एक पूर्ण विकसित शास्त्र है जिसमें केवल एक कुंडली उपलब्ध होने पर उस मनुष्य के समस्त जीवन का खाका खींचा जा सकता है | यहाँ तक कि उसके खानपान संबंधी आदतें भी कुंडली से बताई जा सकती हैं |
धन स्थान से भोजन का ज्ञान होता है | यदि इस स्थान का स्वामी शुभ ग्रह हो और शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति कम भोजन करने वाला होता है |
यदि धनेश पाप ग्रह हो, पाप ग्रहों से संबंध करता हो तो व्यक्ति अधिक खाने वाला (पेटू) होगा | यदि शुभ ग्रह पाप ग्रहों से दृष्ट हो या पाप ग्रह शुभ से (धनेश होकर) तो व्यक्ति औसत भोजन करेगा |
लग्न का बृहस्पति अतिभोजी बनाता है मगर यदि अग्नि तत्वीय ग्रह (मंगल, सूर्य बृहस्पति) निर्बल हों तो व्यक्ति की पाचन शक्ति गड़बड़ ही रहेगी |
धनेश शुभ ग्रह हो, उच्च या मूल त्रिकोण में हो या शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो व्यक्ति आराम से भोजन करता है |
धनेश मेष, कर्क, तुला या मकर राशि में हो या धन स्थान को शुभ ग्रह देखें तो व्यक्ति जल्दी खाने वाला होता है |
धन स्थान में पाप ग्रह हो, पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति बहुत धीरे खाता है |
खाने में पसंद आने वाली चीजों की सूचना छठे भाव से मिलती है |
छठे स्थान में बुध या बृहस्पति हो तो नमकीन वस्तुएँ पसंद आती हैं |
बृहस्पति बलवान होकर राज्य या धन स्थान में हो तो मीठा खाने का शौकीन होता है |
शुक्र, मंगल छठे स्थान में हों तो खट्टी वस्तुएँ पसंद आती हैं |
शुक्र-बुध की युति हो या छठे स्थान पर गुरु-शुक्र की दृष्टि हो तो मीठी वस्तुएँ पसंद आती हैं |
छठे स्थान में सिंह राशि हो तो तामसी भोजन (मांस-अंडे) पसंद आता है | वृषभ राशि हो तो चावल अधिक खाते हैं |
बुध पाप ग्रहों से युक्त होने पर मीठी वस्तुएँ बिलकुल नहीं भातीं |


                   


धन कब लेवें और कब देवें

यह समस्या केवल व्यवसायी वर्ग की ही नहीं है. आज हर कोई इस जाल में उलझा हुआ है. कोई धन उधार देकर रोता मिलता है तो कोई धन लेकर पछता रहा है. पहले किसी से कर्जा लेने के लिए साहुकार की मिन्नतें करनी होती थीं पर अब गली-गली उधार देने वाले फिरते रहते हैं.
ज्योतिष में कर्ज संबंधी इन समस्याओं से सुखी रहने के तरीके बतलाये हैं.ज्योतिष के इन नियमो का प्रयोग दैनिक जीवन में किया जाये तो इस उधार रूपी राक्षस को अपने अनुकूल बनाया जा सकता है,सुखी रहा जा सकता है.व्यापारी वर्ग को कुछ लेनदेन तो रोज करने होते हैं, उनमें भी इन नियमों का पालन किया जाये तो धन विनियम अच्छा होता है.लेकिन जो बडे लेनदेन या अग्रिम भुगतान के मामले हैं उनको निम्न प्रकार से संपादित किया जाये तो अच्छा लाभ मिलता है अथवा सुख मिलता है
- जैसे सबसे सरल नियम यह है-
"ऋणे भौमे न ग्रहीयात, न देयं बुधवासरे। ऋणच्छेदनं भौमे कुर्यात्, संचये सोम नंदने||"
अर्थात् धन के लेनदेन में मंगलवार और बुधवार बडे महत्व के होते हैंमंगलवार उधार लेने में अशुभ है तो बुधवार देने में.आपको यदि धन की आवश्यकता पड़ जाये तो मंगलवार को कभी नहीं लेना चाहिये. इस उधार को चुकाने में बडी कठिनाई आती है और किसी को बुधवार को धन उधार दे दिया तो उस धन को प्राप्त करने में मुश्किलें आती हैं,यहां तक कि रिश्तों में भी दरारें उत्पन्न हो जाती हैं.यह एक सरल नियम हैं जो आसानी से याद रखा जा सकता है और दैनिक जीवन में उपयोग किया जा सकता है
लेकिन मंगलवार ऋण चुकाने के लिए अतिश्रेष्ठ रहता है.धन संचय अर्थात् बैंकों में धन जमा कराने के लिए या सुरक्षित रखने के लिए बुधवार सर्वश्रेष्ठ दिन होता है
जब किसी बहुत बड़े लेनदेन का मामला हो तो अनुकूल दिन का चयन इस प्रकार करना चाहिये.
मंगलवार,सूर्य संक्रांति वाला दिन,वृद्धि योग,हस्त नक्षत्र से युक्त रविवार इन दिनों में ऋण कभी नहीं लेना चाहिये,चाहे कितनी ही बड़ी जरूरत हो.इनके अलावा कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, आश्लेषा, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा,उत्तराभाद्रपद नक्षत्रों में, भद्रा,व्यतिपात और अमावस्या को दिया गया धन कभी वापस प्राप्त नहीं होता, यहां तक कि झगडे की नौबत भी आ जाती है.
ये बातें बहुत छोटी सी हैं,ज्योतिष के सामान्य से नियम हैं,पर इनको अपनाने से बहुत बडे विवादों से बचा जा सकता है, रिश्तों को टूटने से बचाया जा सकता है. लेनदेन का भय मिट जाता है.
वर्तमान परिस्थितियों में जिसका लेनदेन अच्छा है,उसकी बाजार में साख अच्छी बन जाती है.जो कि वर्तमान में समाज में रहने और जीने के लिए अति आवश्यक है
अत: मंगलवार को लेना नहीं चुकाना है और बुधवार को देना नहीं जमा कराना है.
अपने धन का यदि कहीं विनिवेश करना हो तो मंगलवार और बुधवार के अतिरिक्त अन्य वारों में,पुनर्वसु-स्वाति-मृगशिरा-रेवती-चित्रा-अनुराधा-विशाखा-पुष्य-श्रवण-धनिष्ठा-शतभिषा और अश्विनी इन नक्षत्रों में (यह नक्षत्र उत्तरोत्तर शुभ हैं.) और चर (मेष-कर्क-तुला-मकर) लग्नो में, जबकि लग्न से 8वें भाव में कोई भी ग्रह न हो, तब विनिवेश करना चाहिये. इस समय में किया गया धन का निवेश धन को बढ़ाता है.


सात वारों में क्या करें और क्या नहीं करें


वार सात होते हैं, कोई कहता है इन सप्तवार में ये करो तो ऐसा हो जाएगा और ये न करो तो वैसा हो जाएगा । लोक में प्रचलित इन तथ्यों को अपनाने से कई बार लाभ हो जाता है । आज यहां बता रहे हैं कि इन सप्तवारों में क्या करें और क्या नहीं करें तो उचित है 
1 रविवार, मंगलवार और गुरूवार को नमक नहीं खाना चाहिए । इनमें नमक खाने से स्वास्थ्य बिगड़ने की सम्भावना होती है और कार्य में बाधा आती है । यदि इन वारों में कार्य करने पर बाधा आती हो तो नमक खाए बिना कार्य करें वह बन जाएगा ।
2 यदि मंगलवार को आपके कार्यों में बाधा आती है तो आप मंगलवार को हनुमान जी की प्रतिमा पर सिन्दूर का चोला चमेली के तेल में चढ़ाएं आपका कार्य बन जाएगा ।
3 बुधवार को लड़की की माता को सिर नहीं धोना चाहिए । ऐसा करने से लड़की का स्वास्थ्य बिगड़ता है या उसके समक्ष कष्ट आता है ।
4 मंगलवार को किसी को ऋण नहीं देना चाहिए वरना दिया गया ऋण आसानी से वापिस नहीं होता है, उसके मिलने में उम्मीद से अधिक समय लगता है ।
5 धन बुधवार को बैंक में जमा कराना चाहिए । ऐस करने पर वह अधिक दिन तक खर्च नहीं होता है अर्थात् धन में बरकत होती है 
6 यदि आपका कार्य बार-बार करने से नहीं बन रहा है तो आप बुधवार को उत्पन्न सन्तान से कार्य कराएं आपका कार्य बन जाएगा। मिलती है ।
7 लड़के को शनिवार के दिन ससुराल नहीं भेजना चाहिए । शनिवार के दिन तेल, लकड़ी, कोयला, नमक, लोहा या लोहे की वस्तु क्रय करके नहीं लानी चाहिए । वरना बिना बात की बाधा का सामना करना पड़ता है और अचानक कष्ट आ जाता है ।
8 पुत्र नहीं है और एकलौता है तो गुरुवार को शेविंग न करें और न हजामत बनाएं, वरना सन्तान सुख में बाधा आती है।

किस देवता को कौन सा फूल चढ़ाएं


हिंदू धर्म में विभिन्न धार्मिक कर्म-कांडों में फूलों का विशेष महत्व है । धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, आरती आदि कार्य बिना पुष्प के अधूरे ही माने जाते हैं । पुष्प के संबंध में शारदा तिलक में कहा गया है-
दैवस्य मस्तकं कुर्यात्कुसुमोपहितं सदा ।
अर्थात देवता का मस्तक सदैव पुष्प से सुशोभित रहना चाहिए । वैसे तो किसी भी भगवान को कोई भी फूल चढ़ाया जा सकता है लेकिन कुछ पुष्प होते हैं जो देवताओं को विशेष प्रिय हैं । कौन से भगवान की पूजा किस फूल से करें, इसके बारे में यहां संक्षिप्त जानकारी दी जा रही है-
श्रीगणेश- आचार भूषण ग्रंथानुसार भगवान श्रीगणेश को तुलसीदल को छोड़कर सभी प्रकार के फूल चढ़ाए जा सकते हैं ।
शंकरजी- भगवान शंकर को धतूरे के पुष्प, हरसिंगार, व नागकेसर के सफेद पुष्प, सूखे कमल गट्टे, कनेर, कुसुम, आक, कुश आदि के पुष्प चढ़ाने का विधान है ।
सूर्य नारायण- इनकी उपासना कुटज के पुष्पों से की जाती है। इसके अलावा कनेर, कमल, चंपा, पलाश, आक, अशोक आदि के पुष्प भी प्रिय हैं ।
भगवती गौरी- शंकर भगवान को चढने वाले पुष्प मां भगवती को भी प्रिय हैं । इसके अलावा बेला, सफेद कमल, पलाश, चंपा के फूल भी चढ़ाए जा सकते हैं ।
श्रीकृष्ण- अपने प्रिय पुष्पों का उल्लेख महाभारत में युधिष्ठिर से करते हुए श्रीकृष्ण कहते हैं- मुझे कुमुद, करवरी, चणक, मालती, नंदिक, पलाश व वनमाला के फूल प्रिय हैं ।
लक्ष्मीजी- इनका सबसे अधिक प्रिय पुष्प कमल है ।
विष्णुजी- इन्हें कमल, मौलसिरी, जूही, कदम्ब, केवड़ा, चमेली, अशोक, मालती, वासंती, चंपा, वैजयंती के पुष्प विशेष प्रिय हैं ।
किसी भी देवता के पूजन में केतकी के पुष्प नहीं चढ़ाए जाते।

नेल पॉलिश-राशि अनुसार


ज्योतिष में रंगों का विशेष महत्व बताया गया है। राशि अनुसार अनुकूल रंगों के प्रयोग से संबंधित ग्रह की अनुकूलता में वृद्धि होती है । शरीर के लिए भी अनुकूल रंगों के प्रयोग करने से सकारात्मक ऊर्जा को संतुलित कर समन्वय किया जा सकता है । इससे सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसी क्रम में महिलाओं द्वारा प्रयोग की जाने वाली नाखून पॉलिश का रंग यदि उनकी राशि के अनुरूप हो तो संबंधित राशि स्वामी के कारक में वृद्धि तथा शुभ फलों की प्राप्ति होती है ।
मेष राशि- मेष राशि की महिलाएं लालिमायुक्त, सफेद, क्रीमी तथा मेहरून रंग की नेल पॉलिश प्रयोग में लाएं ।
वृष राशि- लाल, सफेद, गेहूंआ या गुलाबी रंग या इनसे मिश्रित रंगों की नेल पॉलिश लगाएं ।
मिथुन- आपके लिए हरी, फिरोजी, सुनहरा सफेद या सफेद रंग की नेल पॉलिश उपयुक्त रहेगी ।
कर्क- श्वेत व लाल या इनसे मिश्रित रंग अथवा लालिमायुक्त सफेद रंग की नेल पॉलिश का प्रयोग उपयोगी रहेगा ।
सिंह- गुलाबी, सफेद, गेरूआ, फिरोजी तथा लालिमायुक्त सफेद रंग उपयुक्त है ।
कन्या- आप हरे, फिरोजी व सफेद रंग की नेल पॉलिश लगाएं ।
तुला- जामुनी, सफेद, गुलाबी, नीली, ऑफ व्हाइट एवं आसमानी रंग की नेल पॉलिश अनुकूल रहेगी ।
वृश्चिक- सुनहरी सफेद, मेहरून, गेरूआ, लाल, चमकीली गुलाबी या इन रंगों से मिश्रित रंग की नेल पॉलिश लगाएं ।
धनु- पीला, सुनहरा, चमकदार सफेद, गुलाबी या लालिमायुक्त पीले रंग की पॉलिश लगाएं ।
मकर- सफेद, चमकीला सफेद, हल्का सुनहरी, मोरपंखी, बैंगनी तथा आसमानी रंग की नेल पॉलिश उपयुक्त है ।
कुंभ- जामुनी, नीला, बैंगनी, आसमानी तथा चमकीला सफेद रंग उत्तम रहेगा ।
मीन- पीला, सुनहरा, सफेद, बसंती रंगों का प्रयोग करें। सदा अनुकूल प्रभाव देंगे ।
ऊपर बताए गए रंग राशि स्वामी तथा उनके मित्र ग्रहों के रंगों के अनुकूल हैं ।
नाखून भी बताते हैं इंसान का स्वभाव:हमारी अंगुलियों की सुन्दरता बढ़ाते हैं साथ ही ये अंगुलियों के पोरों की रक्षा भी करते हैं लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि नाखून कैसे हैं। उनका आकार और आकृति कैसी है, इससे आप सिर्फ अपने बारे में ही नहीं बल्कि किसी दूसरे व्यक्ति के स्वभाव के बारे में महत्वपूर्ण बातें पता लगा सकते हैं । ये हम नहीं कहते ये तो ज्योतिष विज्ञान कहता है ।
छोटे नाखून वाले व्यक्ति चाहे कितने भी उच्च घराने में पैदा हुए हों, ये अच्छे स्वभाव के नहीं होते हैं। ऐसे व्यक्ति असभ्य व स्वार्थी होते हैं।- छोटे और पीले नाखून व्यक्ति के मक्कार स्वभाव को प्रदर्शित करते हैं ।
गोलाकार नाखून व्यक्ति के सशक्त विचारों व तुरंत निर्णय लेने की क्षमता को बताते हैं ।
पतले व लम्बे नाखून वाले लोग जल्दी निर्णय नहीं ले पाते हैं और इसी प्रवृति के कारण कई बार इन्हें नुकसान उठाना पड़ता है ।
छोटे नाखून व गांठदार अंगुलियां हों तो ऐसे जीवन साथी अपने पार्टनर को इशारों पर नचाते हैं ।
जिन लोगों के नाखून लम्बाई की अपेक्षा अधिक चौड़ाई लिए हुए होते हैं, वे लोग क्रोधी व जिद्दी स्वभाव के साथ ही स्वतंत्रता पसंद करने वाले होते हैं ।
कठोर नाखून वाले व्यक्ति झगड़ालु प्रवृति के साथ ही अपनी जिद के पक्के होते हैं। ये जो ठान लेते हैं, वो कर के ही दम लेते हैं । चाहे वे फिर सही हों या गलत, उन्हें इस बात की परवाह नहीं होती है ।
वे लोग जिनके नाखून चौड़ाई से अधिक लम्बाई लिए हों तो ऐसे लोग निरंतर आगे बढऩे वाले होते हैं व अपने जीवन में उन्नति करने वाले होते हैं ।
कुछ बातें नाखून के बारे में ( Some  things about Nail )
    
   मीन पर पड़ी पतली से पतली पिन को उठाने में आपके नाखून आपकी मदद तो करते ही हैं। जरा सोचिये, यदि उँगलियों पर नाखून न होते तो समाज इस खूबसूरती से वंचित न रह जाता ?
आपके नाखूनों में और भी बहुत से रहस्य छिपे हैं, आपके नाखून आपके व्यक्तित्व, आपके स्वस्थ और आपकी समृद्धि के संबंध में भी बताते हैं। यदि अपने नाखूनों पर प्रकृति द्वारा अंकित शुभ संदेशों को पढ़ लें तो आप अपने जीवन को और अधिक सुखी बना सकते हैं ।
यदि किसी के नाखून बढे हुए हैं तो इसका सीधा अर्थ है कि वह व्यक्ति बहुत ही आलसी और कामचोर है ।
यदि नाखूनों में मेल भी है तो समझिये कि वह अत्यंत दुखी व्यक्ति है। लेकिन इसी के साथ ऐसे व्यक्ति का विशेष गुण यह है कि वह किसी को धोखा नहीं देना चाहता। वह अधिकतर चुप रहना चाहता है ।
यदि आपके नाखून लाली दर्शा रहे हैं तो आप प्यार के मामले में बहुत ही भाग्यशाली हैं। आप प्यार दे सकते हैं, और प्यार पा सकते हैं ।
यदि नाखूनों में सफेदी की चमक अधिक है तो इसका अर्थ है- दुर्भाग्य ।
कभी-कभी यदि गुलाबी नाखून वाले व्यक्ति को देखें तो पायेंगे कि वह अपने वायदे निभाने में पका है, चाहे इन वायदों का संबंध पैसे से हो या प्यार-मुहब्बत के मामलों से हो ।
किसी व्यक्ति को आप नाखून चबाते देखें तो समझ लें कि वह व्यक्ति अपनी जिन्दगी को भी यूं ही चबा रहा है, अर्थात गँवा रहा है और जीवन के संघर्ष में समय के साथ नहीं चल रहा, इसका अर्थ यह भी हुआ कि व्यक्ति का अपने ऊपर नियंत्रण नहीं है और तनाव में जी रहा है। ऐसा व्यक्ति अक्सर तनाव सम्बन्धी तकलीफें अपने बारे में बताता हुआ मिलेगा ।
यदि कोई व्यक्ति बात करते हुए नाखूनों  को चबाता भी जा राह है तो समझ लें कि उस व्यक्ति के मन में कुछ और है वह कह कुछ और रहा है ।
कई प्रकार की रक्त संबंधी बीमारियों का पता नाखूनों द्वारा लगता है । जब कभी नाखूनों के नीचे खून के धब्बे उभरते नजर आएं तो समझ लें कि कोई रक्त संबंधी बीमारी हो गई है और चिकित्सक को दिखाएँ ।
ह्रदय रोग से पीड़ित व्यक्ति की पहचान है कि उसके नाखून हलके नीले पद जाते हैं। यदि आपके नाखून सफेदी लिये हुए हैं तो समझ लें आपमें खून की कमी हो गई है और आप 'एनीमिक' हैं ।
हम अपने नाखूनों को काटते हैं, घिसते हैं, उन्हें रूप देते हैं, सुन्दर बनाते हैं, लेकिन हमारे स्वस्थ में वे महत्वपूर्ण सूचनाएं देते हैं, जैसे- एनीमिक होने के साथ और विटामिनों की कमी के बारे में भी बताते हैं ।
नाखूनों के संबंध में मजेदार बात यह है कि गर्मियों में वे अधिक तेजी से बढ़ते हैं ।
नाखूनों के बढ़ने की औसत गति गर्मियों के मौसम में एक मास में एक इंच का आंठवा भाग बढ़ने की है । बीच की ऊंगली का नाखून अधिक तेजी से बढ़ता है, जबकि बाकी दो ऊँगलियाँ कम गति से बढती हैं। इनसे भी कम गति से अंगूठे और छोटी ऊंगली के नाखून बढ़ते हैं । यदि किसी दुर्घटनावश आपकी ऊंगली या अंगूठे का पूरा नाखून ही उतर जाए तो नया नाखून पूर्ण रूप से बढ़ने में लगभग आधा साल लग जाता है। यदि आप अपने नाखून कभी न काटें या उन्हें टूटने भी न दें और पचास वर्षों तक इसी प्रकार से बढ़ने दें तो उनकी औसत लम्बाई 6 फुट हो जायेगी ।
कैसे रखें नाखूनों का खयाल:कैल्शियम पदार्थों का सेवन न करना शहरवासियों के नाखूनों पर सितम ढा रहा है । खासतौर से महिलाओं में नाखून बढ़ाने और उन्हें सुंदर दिखाने का क्रेज होता है मगर बार-बार नाखून टूटने के कारण वह इस शौक को पूरा नहीं कर पाती हैं ।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि खान-पान सही हो तभी नाखून स्वस्थ रह सकते हैं । वहीं ब्यूटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक अच्छे भोजन के अलावा नाखूनों की सही देखभाल करने से ही वे गुलाबी और चमकदार रहते हैं ।
प्रायः देखने में आता है कि जिन लोगों के नाखून भूरे या टूटे होते हैं वे या तो एल्कोहल का सेवन अधिक करते हैं या फिर खाने में कैल्शियम का प्रयोग नहीं करते हैं । यदि चेहरे और बालों की तरह थोड़ा-सा खयाल नाखूनों का भी रखा जाए तो वे गुलाबी और चमकदार दिखेंगे । 
                                                                       ऐसे रखें नाखूनों का खयाल
1. मेनिक्योर और पेडिक्योर आदि करवाते रहें ।
2. हफ्ते में दो दिन हाथ और नाखूनों की किसी भी अच्छी क्रीम से मसाज करें ।
3. नेल पॉलिश रिमूवर लोकल न हो, बल्कि ब्रांडेड हो । 
4. विटामिन-ई कैप्सूल को नाखूनों पर लगाने से वह कोमल रहते हैं ।
5. खाने-पीने में कैल्शियम, जिंक, आयरन युक्त खाना जैसे - फल, सब्जियां, मूंगफली, मछली, अंडा, लहसुन, प्याज के साथ ही खूब पानी पिएँ और दूध का सेवन करें ।
6. अधिक मीठा न खाएँ और एल्कोहल के सेवन से बचें ।
7. नकली नाखून न लगाएँ क्योंकि इसे जब उतारते हैं तो इससे असली नाखूनों की प्राकृतिक नमी चली जाती है ।
8. नाखूनों को ब्लेड से न काटकर सिर्फ नेल कटर और फाइलर का इस्तेमाल करें ।
9. नाखूनों को मुँह से कभी भी नहीं काटना चाहिए। इससे संक्रमण फैलता है ।